रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना एक सुंदर संकल्पना है, लेकिन बदलते समय के साथ और पीढ़ियों के बीच जिसे कहीं भुला दिया गया है, जो अब समय की मांग बन गया – जैसे प्रकृति कह रही हो “अरे, देखो यहाँ! मेरे पास वह सब है जो तुम्हें चाहिए!”
अब पूर्ण पुनरुद्धार का समय आ गया है!
पुराने समय में हमारी जीवनशैली बहुत अलग हुआ करती थी – आरोग्यकर और प्रकृति से साथ लयात्मक: ब्रह्म मुहूर्त में उठना, हमारी घड़ियाँ सर्कैडियन लय में स्थित थीं एवं कार्य करने के दिन का सबसे उत्पादक समय सुबह 5.30 या उससे भी जल्दी होता था।
और यह नोट करना लाभप्रद है कि हमारी सुबह की प्रक्रियाएँ ज्यादातर उदार प्रकृति के बीच होती थी, चाहे वह नदी किनारे चलना हो या खेतों की हरियाली और बाग बगीचे हों। सुबह के सूर्य की किरणें हमें ऊर्जावान बनाती थीं और हमारे शरीर को प्राकृतिक तौर पर विटामिन-डी मिल जाया करता था। हमारे आसपास बहुत सारी जीवन रक्षक जड़ी बूटियाँ उपलब्ध थीं जो हमें सारे दिन ऊर्जा से भरे रखती थीं। यद्यपि कई वर्षों में जीवनशैली बदलाव के कारण हम इन सबसे अलग हो चले हैं और कंक्रीट के जंगल अब हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं, यातायात में बहते हुए, मोबाइल फोनों की गूंज के बीच, हमारा पारंपरिक औषधीय सेवन कमर्शियल पेय से प्रतिस्थापित और अन्य सभी प्रकार की तकनीकी क्रान्ति से घिरा हुआ है।
एक कदम आगे, आज के महामारी के युग में, हम लोग घरों की सीमाओं में कैद हो कर रह गए हैं। प्रतिबंधित क्षेत्रों के मध्य, उपकरणों में उलझे हुए समय, दूरस्थ कार्यस्थान, स्कूल, और साँस लेने हेतु सीमित स्थान इत्यादि, समूची मानवता विभिन्न प्रकार के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तनाव के पराधीन हो गई है। फिर भी, अनिश्चितता का समय हमारे लिए अवसरों का समंदर खोल देता है। यही समय प्राकृतिक उपचार द्वारा बहाली और पुनश्च स्वास्थ्य को पाने का समय है; यह जानने का कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता के वर्धन हेतु प्रकृति अवश्यंभावी रूप से बुद्धिमत्ता और लय वहन करती है। घर में बैठे बैठे जड़ीबूटी ज्ञान, हमारे आसपास के कमरों में, बगीचों में, बालकनियों में, छतों पर हरित क्षेत्रों का सृजन जैसे सहज सूझबूझ के ज्ञान को पुनर्जीवित करने के लिए हमारे हाथ में सारे नुस्खें मौजूद हैं।
सरल किन्तु प्रभावशाली फूल और जड़ी बूटी से आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली को सक्रिय करें
यह जड़ी बूटियाँ न केवल औषधीय मिश्रण बल्कि 20 प्रकार से भी अधिक औषधीय चाय का रूप ले सकती हैं जो आपके पूरे शारीरिक प्रणाली को पुनर्जीवित कर देगा।
- ब्रह्म कमल
- शंख पुष्पी
- गिलोय
- अदरक
- पिप्पली
ब्रह्म कमल (Bhrama Kamal in Hindi)

सृजन के देवता के नाम पर, यह अत्यंत दुर्लभ, पावन पुष्प है जो बेहद सुंदर है और घर की सजावट में चार चाँद लगा देते है साथ ही अपनी औषधीय खुशबू फैलाते है।
यह पुष्प सावन में खिलते हैं और घर में उगाए जाने वाला सबसे उत्तम पौधा है जो आपके पॅरासिटामॉल को प्रतिस्थापित कर सकते है और यह सामान्य सर्दी, बुखार और यहाँ तक कि उदर और यूरोजेनिटल गड़बड़ियों से भी राहत देने में प्रबल है। कुछ पंखुड़ियों से बनी चाय आपको संक्रमण से छुटकारा दिलाएगी, प्राकृतिक रूप से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगी।
शंख पुष्पी (Shankha Pushpi in Hindi)

शंख पुष्पी या अपराजिता एक पारंपरिक औषधीय कष्ट निवारक है जो हमें नाना प्रकार के स्वास्थ्य लाभ से धन्य करता है। यह एक शानदार एंटी ऑक्सीडेंट है और हमारे शरीर से विषैले तत्वों को बाहर करने में मदद करता है।
हमारे परंपरागत औषधीय प्रणाली के अनुसार, इस जड़ी बूटी को जीवनावधि समर्थक, शक्ति, स्मरण-शक्ति, केंद्रित करने वाला और बुद्धिमत्ता देने वाला माना गया है।
यह इन उपचारों के लिए महत्वपूर्ण है
- मानसिक थकान,
- अनिद्रा,
- तनाव,
- उच्च रक्तचाप और अवसाद.
- आमवात और गठिया रोग पीड़ा
इसके रस को गर्म दूध के साथ लिया जा सकता है।
गिलोय (Giloy in Hindi)

अमृता वल्ली या गिलोय एक अद्भुत औषधीय गुणों वाली चमत्कारी प्राचीन बूटी है। इसका “अमृता” नाम ही अमरत्व या अमृत का वर्णन करता है। अभी जो शेल्फ स्टॉक की लोकप्रिय दवाइयाँ हैं। उसको आप अपने घर के बगीचे में बिल्कुल ताजा उगा सकते हैं।
इसकी एन्टी-ऑक्सीडेन्ट, एन्टी-माइक्रोबियल, सूजन विरोधी, ज्वरनाशी एवं एंटी-एलर्जिक गुणों से यह बूटी रक्त को शुद्ध करता है, विषैले तत्वों को हटाता है, बीमारियाँ फैलाने वाले जीवाणुओं से लड़ता है, यकृत के रोगों से लड़ता है, एवं मूत्रीय प्रणाली के संक्रमण को रोकता है। यह कैंसर विरोधी कारक होने से जीव कोषों को पुनर्जीवित करने में मदद करता है।
इसके अलावा, तनाव को मात देने, प्रतिरोधकता वर्धक और नित्य प्रतिदिन हमें ऊर्जावान बनाए रखता है।
अदरक (Ginger in Hindi)

अदरक – यह बूटी हमारे यहाँ की पैदाइश है, हमारे रसोईघरों में बहुतायत में उपयोग की जाने वाली, विविध औषधीय गुणों और लाभों से परिपूर्ण है। अदरक की जड़ हमारे घर के बगीचे में आसानी से उगाई जा सकती है, रक्षक है एवं उपचार की ढेरों शक्ति से निहित है। यह आंतडीयों को ठीक करता है, पाचन क्रिया को नियमित करता है और श्वसन समस्याओं के लिए बेहद प्रभावशाली है। नित्य सुबह, अदरक का रस, नींबू के कुछ बूंदे और शहद के साथ लेने से सामान्य सर्दी को दूर रखता है, मौसमों के प्रभाव को कोने करता है। यह आपको दिन भर हल्का, तरोताजा और सक्रिय रखता है।
पिप्पली (Pippali in Hindi)

पिप्पली या भारतीय लंबी काली मिर्च एक अनोखी बूटी है जो विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में प्रयोग की जाती है। यह अपच ठीक करने सहायक है, अस्थमा, खाँसी, बुखार और अन्य साँस संबंधी बीमारियों में उपयोगी है। यह भूख को भी सुधारता है।
त्रिदोषक कहलाने वाली यह बूटी सभी प्रकार के शारीरिक प्रकृतियों के लिए उचित है। इस बूटी से बनाया गया मिश्रण श्वसन और पाचन गडबडियों में तुरंत राहत देता है और रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति को दृढ़ करता है।
नुस्खा:
- 5 पत्तियां पिप्पली
- ½ इंच अदरक
- ½ इंच हल्दी
उक्त सुझाए गए बूटियों को 200 मि.ली. पानी में उबालें, स्वाद के लिए गुड़ मिलाएँ।
वैकल्पिक तौर पर तुलसी, अमृता वल्ली और पिप्पली को थोड़े से गुड़ और कुछ बूंदे नींबू के साथ बनाने से एक रूचिर चुस्की बनती है जो हमारे शरीर को तुरंत ही फिर से जवान बना देती है।
हमारी परम्परा उन सभी पर गौर करती है जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं, पवित्र हैं। जैसे कि तुलसी और नीम, जिसमें ज्वर नाशक और रोग प्रतिरोधक वर्धन गुण हैं, को प्राचीन समय से ही बहुत पवित्र मानती है। नींबू शक्ति का प्रतीक है इसलिए इसे देवी माँ के मंदिरों के त्रिशूल के ऊपर स्थान दिया गया है। तुलसी भगवान विष्णु के उपस्थिति का प्रतीक है। बेल पत्रियाँ जो स्नायु तंत्र के कार्य पद्धति को सुधारता है, भगवान शिवजी का प्रतीक है।
विशिष्ट रूप से यह सब प्रकृति के सभी आयामों में दिव्यता के निवास को इंगित करती है – फूलों में, फलों में, पत्तियों और पेड़ों में।
हमारे आहारीय अनुपूरक में सहायक इन सभी बूटियों को अपने बगीचे में अन्य पौधों के साथ उगाया जा सकता है। यह इकोसिस्टम में सहजीविता के साथ, समृद्धि के साथ बढ़ते हैं, हमारे आसपास स्वस्थ वातावरण निर्माण करते हैं और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बल देते हैं।
जब पर्यावरण में उचित लय सृजित होती है, हमारी श्वसन प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से संतुलन स्थापित कर लेती है, हमारे घरों के आश्रय में ही हमें स्वस्थ बनाए रखती है।