“मैंने अपने पूरे जीवन में कभी इतना हल्का अनुभव नहीं किया। आज मैं इतनी शान्ति और आंतरिक मौन महसूस कर रहा हूँ, जैसा पहले कभी नहीं किया”।
यह कहना है तिहाड़ जेल, दिल्ली में एक युवा कैदी का।
तिहाड़ जेल परिसर के जेल नंबर 5 में लगभग 200 युवा कैदियों के लिए आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित युवा सशक्तिकरण एवं कौशल विकास (Youth Empowerment and Skills, YES+) शिविर का युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ा।16 से 25 वर्ष की आयु के किशोर वय के उन युवाओं का समूह अपनी हठधर्मिता, असभ्य तथा विद्रोही व्यवहार के लिए कुख्यात था। हमारे YES+ प्रशिक्षक, रोहित रंजन यह स्वीकार करते हुए कहते हैं, “आरंभ में उनके ध्यान को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन सुदर्शन क्रिया करने के उपरांत उनसे संबंध स्थापित करना सुगम हो गया।”
यह शिविर पाँच दिन तक चला, जिसे 12 प्रशिक्षकों ने चलाया। यद्यपि युवा प्रतिभागी आरंभ में थोड़े अनिच्छुक थे, धीरे धीरे वे कोर्स में रुचि लेने लगे और उसका आनंद उठाने लगे। तीसरे दिन से तो उनमें हुए परिवर्तन को स्पष्ट देखा जा सकता था और वे कार्यशाला के संचालन में सहायता करने तथा स्वयंसेवक के रूप में भाग भी लेने लगे थे। कार्यशाला के अंत तक तो वे ग्रहणशील बन चुके थे और अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव भी बाँटने लगे थे। सईद (परिवर्तित नाम), एक 22 वर्षीय युवा था, जिसने धूम्रपान त्यागने और अपराधी जीवन को छोड़ने की क़सम खाई।
उनके अनुभव सुन कर आपको रोना आ सकता है
YES+ प्रशिक्षक कर्ण निझावन अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं, “प्रारंभ में तो उनको कोई काम बताना और उसे करवाना अत्यंत कठिन था, किंतु समय बीतने और सुदर्शन क्रिया का अनुभव लेने के उपरांत तो उनमें परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा था। उनके अनुभव सुन कर तो कोई भी रो सकता है।”
जेल के कर्मचारियों ने भी माना कि इस कार्यक्रम का उस पूरे समूह पर आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ा था। जेल नंबर 5 के अधीक्षक, श्री एस०सी०भारद्वाज ने कहा कि इस कार्यक्रम का संचालन अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से किया गया था तथा यह क़ैदियों के लिए अत्यधिक लाभकारी रहा। उन्होंने कहा, “श्वास प्रक्रियाओं ने नकारात्मक भावनाओं को त्यागने तथा जीवन को एक नए परिप्रेक्ष्य से देखने, सोचने और समझने में कैदियों की बहुत सहायता की है। उनको अपने छिपे हुए गुणों को निकालने और निखारने में प्रेरणा मिली है।”
तिहाड़ जेल में वर्ष 1999 से प्रशिक्षण
आर्ट ऑफ लिविंग के कैदियों के लिए कार्यक्रम तिहाड़ जेल में 1999 से ही चल रहे हैं। केवल तिहाड़ जेल में ही 48,000 से अधिक कैदी अब तक इन कार्यक्रमों द्वारा लाभान्वित हो चुके हैं। जेल कर्मचारियों के लिए भी, उनके कार्य की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर, उनको तनाव मुक्त रखने के लिए भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। यह कार्यक्रम वर्ष में दो बार आयोजित किए जाते हैं और अभी तक 130 से अधिक स्टाफ सदस्य आर्ट ऑफ लिविंग हैप्पीनेस प्रोग्राम कर चुके हैं।
















