वज्रासन क्या है?
‘वज्र’ का अर्थ है हीरे के आकार का या वज्र जैसा; ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा। वज्रासन का नाम इसके आकार के आधार पर रखा गया है – हीरा या वज्र। यदि कोई एक समग्र आसन है जिसे आप आसानी से कर सकते हैं और फिर भी विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते हैं, तो वह है वज्रासन, अदम्य आसन। वज्रासन एक बहुमुखी आसन है जो ध्यान के लिए, अन्य आसनों के बीच आराम करने के लिए या पाचन में सहायता के लिए उपयुक्त है। वज्रासन अन्य योग आसनों में की जाने वाली स्थिति है, जैसे अंजनेय आसन (प्रणाम आसन) और उष्ट्र आसन (ऊंट आसन)।
वज्रासन कैसे करें?
- घुटनों के बल खड़े हो जाएँ और नितंबों को एड़ियों पर रखते हुए बैठे, पंजो को जमीन पर रखें, पैरों के अंगूठे एक दूसरे को छूते हुए।
- पीठ को सीधा रखते हुए अपने हाथों की हथेलियों को अपनी जांघों के ऊपर रखें।
- नाक से धीरे-धीरे साँस लें और इस स्थिति में कम से कम तीन मिनट तक बैठें।
अवधि/ पुनरावृत्तियाँ:
वज्रासन को तब तक किया जा सकता है, जब तक यह आरामदायक हो (और यह आसन करने के कारण पर निर्भर करता है)।
वीडियो : वज्रासन
वज्रासन के लाभ
- पेट के निचले हिस्से में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है, पाचन में सुधार करता है।
- पेट में अत्यधिक गैस और दर्द से राहत दिलाता है।
- पैरों और जांघों की नसों को मजबूत करता है।
- घुटनों और टखनों के जोड़ों को लचीला बनाता है, तथा कुछ गठिया रोगों से बचाता है।
- यह गर्दन और रीढ़ की हड्डी को बिना अधिक प्रयास के सीधा रखता है, जिससे पीठ की नाड़ियों में आसानी से ऊर्जा का प्रवाह होता है।
- कमर और कूल्हे के क्षेत्र को आराम देता है। मासिक धर्म के दर्द के दौरान राहत प्रदान करता है।
- यह प्राणायाम के अभ्यास के लिए आधार मुद्रा के साथ-साथ ध्यान के लिए प्रारंभिक मुद्रा के रूप में भी कार्य करता है।
- पीठ दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।
निषेध
कुछ शारीरिक स्थितियाँ हम पर प्रतिबन्ध लगाती हैं। निम्नलिखित मामलों में लोगों को वज्रासन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए:
- जिन लोगों को पैर, टखने और घुटनों में तीव्र परेशानी या अकड़न हो।
- स्लिप्ड डिस्क के रोगी।
- जिन लोगों को अंगों की गति में कठिनाई होती है, उन्हें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।
वज्रासन के अनोखे तत्व
- यह एकमात्र योग आसन है, जिसे आप भोजन के बाद कर सकते हैं। यदि आप भोजन के बाद वज्रासन में बैठते हैं, तो भोजन अच्छी तरह पचता है।
- यह आसन निचले क्षेत्रों में रक्त के प्रवाह को कम करता है, तथा ऊपरी भागों – पाचन तंत्र, फेफड़े और मस्तिष्क – में रक्त संचार को बढ़ाता है।
- इस आसन की खास बात यह है कि यह आधारभूत आसन है – गोमुखासन, उष्ट्रासन और शिशुआसन जैसे कई अन्य आसन इसी से शुरू होते हैं। प्राणायाम करते समय वज्रासन में भी बैठा जा सकता है। और फिर भी इस आसन में बैठना भी लाभदायक है!
संशोधन और विविधताएँ
संशोधन : यदि एड़ियों पर सीधे बैठना बहुत कठिन हो तो अपनी जांघों और एड़ियों के बीच एक तकिया या कुशन रख लें। यदि आसन के कारण निचले अंगों में रक्त का प्रवाह बाधित हो रहा हो, तो पैरों को जल्दी छोड़ दें।
चुनौती बढ़ाने के लिए : इस योग मुद्रा में अपनी एड़ियों पर बैठते समय अपने पैर की उंगलियों को मोड़ें। ऐसा करने से पैर के अंगूठे में गहरा खिंचाव पैदा होता है।
प्रारंभिक और अनुवर्ती आसन
- सुखासन (प्रारंभिक)
- पवनमुक्तासन (प्रारंभिक)
- शिशुआसन (प्रारंभिक)
- पश्चिमोत्तानासन (अनुवर्ती)
- बद्धकोणासन (अनुवर्ती)
सभी देखें – बैठकर किए जाने वाले योगासन जो ऊर्जा और आराम प्रदान कर सकते हैं।
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