चुलबुली, मुस्कुराती, ध्यान मग्न : श्रावणी
श्रावणी की कहानी जानने के साथ मेरी यात्रा आरंभ हुई। जिसके लिए मैं आंध्र प्रदेश के गुंटूर गांव में पहुंची। जैसे ही मैं वहां के आर्ट ऑफ लिविंग दफ्तर में पहुंची- ताजे बने भोजन की खुशबू मेरी नाक में आई। मैंने झांककर रसोई में देखा।
वहां यह खड़ी थी हरे रंग के फूल वाले कपड़ों में, उसके नाजुक हाथ सब्जी हिला रहे थे। एक गर्मजोशी भरी स्वागत की मुस्कान उसके होठों पर आई। वह सुघडता से रसोई संभाल रही थी, स्वाभाविक अनुभव के साथ रसोई का काम कर रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और बोली मैडम मां! शायद जो सलवार मैंने पहनी थी वह आधुनिक फैशन की थी! ऐसा कुछ नहीं लग रहा था कि उसकी चौकस आंखों से कुछ बच गया हो।
मैं उसकी कहानी सुनने के लिए बेताब थी। मैडम मां ने बताया आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवक और टीचर जोकि स्कूल का ध्यान रखते थे, उन्होंने उस लड़की के बारे में बात की। वह हमारे पास ही बैठी थी, अपने स्वयं के जीवन की कहानी सुनने के लायक वह बड़ी हो गई थी। उसको 11 वर्ष की आयु में श्री श्री सेवा मंदिर में लाया गया था, जब उसके माता पिता एचआईवी के कारण मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। जब उसके माता-पिता के बारे में बात हो रही थी, तब उसकी आंखें आसमान में पंछियों को उड़ता देखते-देखते, जमीन की तरफ चली गई जहां मिट्टी चीटियों से भरी हुई थी। जब उसको यहां लाया गया था तब उसके रक्त में संक्रमण था परंतु अच्छी देखभाल और चिकित्सा के कारण अब उसका स्वास्थ्य बेहतर हो गया है। स्कूल के बाकी अनाथ बच्चों की तरह, जिनके माता-पिता या तो नक्सलवाद के कारण हिंसा के शिकार हो गए, या जिनको परिवार वालों ने घर से निकाल दिया है। उसको श्री श्री विद्या मंदिर गुंटूर के पहले आर्ट ऑफ लिविंग निशुल्क स्कूल के छात्रावास में रहने के बाद ,प्यार से व देखभाल से भरा पोषक वातावरण मिला। मैडम माँ ने बताया, श्रावणी स्वयं प्रेरित लड़की है, जिसने पिछले 7 साल के स्कूल के समय में काफी अच्छे योगदान दिए हैं:
उसने गीता ज्ञान प्रतियोगिता में भाग लिया, योगासन कार्यक्रम में 108 सूर्य नमस्कार पूरे किए, भगवत गीता के 9 अध्याय पूरे किए। गुरु पादुका स्तोत्रम् का उच्चारण सिखा, शिव लिंगाष्टकम स्मरण किया और अपने विद्यालय के बच्चों के साथ भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी किया। पढ़ाई के अतिरिक्त उसको नृत्य करना अच्छा लगता है, पिक्चर देखना पसंद है और ध्यान करना भी।
वह वकील बनना चाहती है। मैडम माँ ने उसके मन में वकील बनने का बीज रखा है! क्योंकि उनको लगता है कि श्रावणी के लिए वकील बनना बेहतर है, क्योंकि वह तार्किक, तेज और बहस करने में अच्छी है।
मेरे को नमस्कार करते समय मैडम माँ ने श्रावणी को बुलाया और कहा कि बाकी बच्चों को संध्या प्रार्थना के लिए एकत्र करो। आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों के समर्पित और सुसंगत प्रयासों से हजारों बच्चों में से यह भी एक बच्ची है जिसका जीवन परिवर्तित हुआ है । यदि मुझे कभी अच्छे वकील की आवश्यकता पड़ेगी तो मुझे पता है कि किसका दरवाजा खटखटाना है।
तत्वमसि : जिसका ज्ञान से जिद्दीपन और गुस्सा गायब हो गया
तत्वमसि एक युवा लड़की है, जो मंत्र जाप करती है ध्यान करती है और अन्य बच्चों के साथ खेलती है, घर के सारे काम करती है, खाना भी बनाती है उसको अभी देख कर विश्वास ही नहीं होता कि उसका भूतकाल इतना आक्रामक था।
तत्वमसि को गुंटूर की पुलिस ने आर्ट ऑफ लिविंग स्कूल को सौंपा था। उसके माता-पिता दोनों नक्सलवादी थे। दोनों संघर्ष के दौरान मारे गए। स्कूल ने मुझे उसके बारे में यह बताया - "ऐसा लगता है कि गुस्सा उसके खून में ही था। वह हर बात पर गुस्से में व्यवहार करती थी, यहां तक कि अपनी प्लेट में दिए गए भोजन पर भी। वह अपना भोजन नाली में फेंक देती थी और वहां से उठाकर खाती थी। यदि उसके पैर में कांटा चुभ जाता तो छात्रावास की वार्डन और स्वयंसेवक उसको ध्यान से देख भाल के साथ निकालने की कोशिश करते, परंतु तत्वमसि क्रूरता से माँस को ही फाड़ देती थी चाहे उस में से खून ही निकल जाए। एक बार उसको अस्पताल भी लेकर जाना पड़ा। डॉक्टर को उसको इंजेक्शन लगाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी। वह इतनी हिंसक प्रतिक्रिया व्यक्त करती थी की उसको हाथ लगाना भी कठिन था।
ऐसे जिद्दी बच्चे जिनमें इतनी हिंसक प्रवृत्ति की थी, उनकों शांत करना व खुश करना क्या संभव था? बहुत महीनों के लगातार प्रयास, देखभाल, प्रेम और ध्यान रखने के बाद तत्वमसि ने अपना पहला बदलने का संकेत दिया - उसने मुस्कुराना शुरू किया और बिना गुस्से के प्रतिक्रिया देनी शुरू की। एक अनाथ लड़की जिसकी किस्मत में हिंसक वातावरण में रहना लिखा था - उसको गुंटूर के आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के स्वयंसेवकों ने दर्द हरने वाला स्पर्श देकर ठीक कर दिया और श्री श्री रवि शंकर जी के बिना शर्त के प्रेम, सद्भावना और प्रेम ने उसके जैसे काफी बच्चों को नया जीवनदान देकर उनका जीवन परिवर्तित कर दिया।
ज्योति : सुदर्शन क्रिया ने जिस की रक्षा की
ज्योति केवल 14 वर्ष की थी जब उसने श्री श्री सेवा मंदिर में अपना पहला कदम रखा। अब उसने मास्टर इन आर्ट्स (एम.ए.) कर लिया है और उसी स्कूल में टीचर बन गई है। सभी टीम अध्यापकों को यूथ लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम (वाई एल टी पी) से गुजरना पड़ता है और आर्ट ऑफ लिविंग के विभिन्न कोर्स करने पड़ते हैं।
जब तक कि उसकी शादी का समय नहीं आया था तबतक उसका जीवन शांति से चल रहा था। सब काम आराम से हो रहे थे! उसके माता पिता दहेज़ देने के लिए स्कूल पर जोर डालने लगे, जिसके लिए स्कूल में मना कर दिया। उसको स्कूल परिसर में रहना अच्छा लगता था। एक दिन छात्रावास में से उसके माता-पिता जबरदस्ती उसको लेकर चले गए। ज्योति ने स्कूल से इस्तीफा दे दिया और अपने माता-पिता के साथ रहने लगी। घर पर वह उस को सताने लगे। दो महीनों तक उसको भोजन और पानी नहीं दिया। बहुत लोग अनिश्चितकालीन उपवास रखते हैं लेकिन उनका शरीर में 10 दिनों के बाद जवाब दे देता है।
उसकी भोजन नलिका बंद हो गई और आते सिकुड़ गई। यहां तक कि मुँह का थूक भी सूख गया। तो आखिरकार उसके माता-पिता अस्पताल में उसको छोड़ कर चले गए। जब ज्योति ने स्वयं डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि उसका जल्दी से जल्दी ऑपरेशन करना पड़ेगा, इस परिस्थिति में वह 1 हफ्ते से अधिक जीवित नहीं रह सकती। उसने गुंटूर के स्कूल में सूचना दी और स्कूल का स्टाफ जल्दी से उसकी मदद करने के लिए पहुंच गया। स्कूल ने उसके ऑपरेशन और उपचार के लिए फीस देने की प्रार्थना स्वीकार कर ली। वह पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गयी और अब उसकी शादी अच्छे परिवार में हो गई है।
वह 2 महीने तक बिना भोजन और पानी के कैसे जीवित रही? ज्योति को विश्वास है कि सुदर्शन क्रिया और उसके प्यारे गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने उसको जीवित रखा।
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श्रावणी, तत्वमसि और ज्योति केवल तीन लड़कियां ही नहीं है बहुत सी लड़कियों में से कुछ हैं, जिनके जीवन को किनारा मिला है तथा जो अपनी सामान्य जिंदगी जी रही है। श्री श्री रविशंकर की दृष्टि को साझा करने की, समाज में सुधार लाने की, सबका जीवन तनाव मुक्त करने की, जीवन का विस्तार, ज्ञान और शांति का संदेश पहुंचाने का स्वयंसेवक अथक प्रयास कर रहे हैं। जब हम सब मिलकर काम करेंगे तो हम बदलाव की लहर बना सकेंगे! अमानवीय कृत्यों को समाप्त करने के लिए, महिलाओं और लड़कियों के प्रति यदि आप अपना समय और शिक्षा देकर महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम में लगना चाहते हैं तो, कृपया करके हमारे साथ जुड़े और इस बदलाव में हमारा साथ दें, या संदेश, प्रतिक्रिया भेजें। webteam.india@artofliving.org
लेखिका : मोनिका पटेल
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